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Balaji Vishwanath बालाजी विश्वनाथ (1713-1720 ई.)

Balaji Vishwanath बालाजी विश्वनाथ (1713-1720 ई.)

Balaji Vishwanath बालाजी विश्वनाथ ब्राह्मण था. जिसने अपना जीवन एक छोटे राजस्व अधिकारी के रूप में प्रारंभ किया था। वह कूटनीति में अत्यंत कुशल था। बालाजी विश्वनाथ ने अनेक बड़े मराठा सरदारों को साहू के पक्ष में कर लिया था।

साहू ने 1713 ई. में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा या मुख्य प्रधान बनाया। बालाजी विश्वनाथ के नेतृत्व में धीरे-धीरे आधिपत्य अधिकांश महाराष्ट्र पर स्थापित कर लिया।

पेशवा ने अपने हाथों में शक्ति का संकेंद्रण कर लिया तथा अन्य मंत्री व सरदार उसके सामने प्रभावहीन हो गए। विश्वनाथ ने अपने बेटे पेशवा बाजीराव प्रथम को मराठा साम्राज्य का कार्यकारी प्रधान बना दिया।

1699-1708 ई. तक बालाजी विश्वनाथ धन्नाजी जादव की सेवा में रहे। 1708 ई. में धन्ना जी की मृत्यु के पश्चात् उसके पुत्र चन्द्रसेन जादव के ताराबाई के पक्ष में मिल जाने पर बालाजी विश्वनाथ को शाहू की सेवा में आने का अवसर प्राप्त हुआ।

शाहू ने चन्द्रसेन के सम्भावित विश्वासघात से बचने के लिए एक नया पद सेनाकर्ते (सेना को संगठित करने वाला) गठित किया और बालाजी विश्वनाथ को उस पर नियुक्त कर दिया।

बालाजी विश्वनाथ ने मराठा शक्ति को बढ़ाने के लिए मुगल अधिकारियों के आपसी विवादों का पूरा फायदा उठाया।

बालाजी विश्वनाथ 1714 ई. में औरंगजेब के मकबरे तक पैदल चलकर खुल्दाबाद गया तथा उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया।

बालाजी विश्वनाथ ने दक्कन की चौथ और सरदेशमुखी देने के लिए जुल्फिकार खाँ को सहमत कर लिया एवं अंत में उसने सैय्यद बंधुओं के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए तथा वह सम्पूर्ण क्षेत्र जो पहले शिवाजी के राज्य का हिस्सा था, साहू को वापस कर दिया गया।

मराठों को दक्कन के छः सूबों की चौथ व सरदेशमुखी प्राप्त करने का अधिकार दे दिया गया उसके प्रतिकार के रूप में साहू ने बादशाह की सेवा में 15,000 घुड़सवार सैनिकों को देने, दक्कन में बगावत और लूटमार रोकने तथा दस लाख रुपयों का सलाना नज़राना करने पर सहमत हो गया। नाममात्र के लिए सही बालाजी विश्वनाथ पहले ही मुगल आधिपत्य स्वीकार कर चुका था।

अपने नेतृत्व में एक मराठा फौज लेकर बालाजी विश्वनाथ 1719 ई. में |सैय्यद हुसैन अली खाँ के साथ दिल्ली गया और फर्रुखशियर का तख्ता पलटने में सैय्यद बंधुओं की मदद की।

मराठा मुगल संधि (बालाजी विश्वनाथ और हुसैन अली के मध्य हुई) की शर्तों को मान्यता रफी-उद्-दरजात ने दी थी।

दिल्ली में बालाजी विश्वनाथ और अन्य मराठा सरदारों ने मुगल साम्राज्य की कमजोरी को स्वयं देखा तथा उनमें अपना प्रभाव क्षेत्र उत्तर की – ओर बढ़ाने की महत्वाकांक्षा ने जन्म लिया

चौथ और सरदेशमुखी सौंपने की प्रथा ने पेशवा को संरक्षण के जरिए अपनी व्यक्तिगत शक्ति बढ़ाने में सहायता दी। बालाजी विश्वनाथ 1720 ई. में मारा गया। जिसके बाद उसके 20 वर्ष का पुत्र बाजीराव प्रथम को पेशवा बनाया गया।

Vishal Singh

Vishal Singh

Teacher
“Hi, I am Vishal Singh. I completed my Graduations in Physics in 2020 at VKSU, Arrah. Now I'm Preparing For Civil Service Exams. I'm Interested Physics as well as History, Polity, Geography, Technology & Science.

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