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Bahmani kingdom बहमनी साम्राज्य 1481 part 2

Bahmani kingdom बहमनी साम्राज्य 1481 part 2

अलाउद्दीन बहमनशाह (1347-1358 ई.)

Bahmani kingdom :- 1347 ई. में हसन गंगू अलाउद्दीन बहमन शाह के नाम से बहमनी का शासक बना तथा गुलबर्गा को अपनी राजधानी बनाया। इसके सिक्के पर द्वितीय सिकंदर अंकित है। इसने संपूर्ण साम्राज्य को चार तराफों (प्रांतों) गुलबर्गा, दौलताबाद, बीदर, बरार में विभाजित किया था।

मुहम्मदशाह प्रथम

1367 ई. में मुदकल के किले पर विजयनगर के शासक बुक्का प्रथम के साथ हुए युद्ध में प्रथम बार तोपखाने का प्रयोग हुआ।

ताजुद्दीन फिरोजशाह (1407-1422 ई.)

फिरोजशाह विद्वान और विभिन्न भाषाओं का ज्ञाता था, वह अपनी पत्नियों से अलग-अलग भाषा में बात करता था। उसने खगोलशास्त्र के अध्ययन के लिए दौलताबाद में एक वेधशाला का निर्माण करवाया। उसने अपने छोटे भाई अहमदशाह के पक्ष में 1422 ई. में राजसिंहासन का त्याग कर दिया था।

शिहाबुद्दीन अहमदशाह प्रथम

सूफी संत गेसूदराज से संपर्क के कारण उसे वलि के नाम से जाना जाता है। वारंगल द्वारा देवराय प्रथम को सहयोग देने के कारण अहमदशाह ने वारंगल को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया तथा साम्राज्य के विस्तृत होने के कारण गुलबर्गा की जगह बीदर को राजधानी बनाया इस नवीन राजधानी को मुहम्मदाबाद नाम दिया गया।

हुमायूँ

इसकी क्रूरता के कारण इसे जालिम शाह के नाम से जाना जाता है। इसे दक्कन का हीरो भी कहा जाता था।

Bahmani kingdom बहमनी साम्राज्य 1481 part 2

 

निजामशाह

निजामशाह के संरक्षक के रूप में मकदूम बेगम, ख्वाजा जहाँ एवं ख्वाजा गवाँ की एक परिषद् का निर्माण हुआ जिसके हाथों में वास्तविक सत्ता थी।

मुहम्मद तृतीय

इसके शासन काल में ख्वाजा जहाँ इसका मंत्री बना। इसके समय में ईरानी व्यापारी महमूद गवाँ ने बहमनी सुल्तान की कृपा प्राप्त कर ली तथा महमूद गवाँ को मलिक-ए-तुन्जार को उपाधि प्रदान की गयी।

महमूदशाह

इसके शासन काल में अराजकता की स्थिति बनी रही। प्रांतीय सूबेदार अपने को स्वतंत्र करने लगे।

इसके पश्चात् महमूदशाह के उत्तराधिकारी कासिम-उल-मुमालिक के हाथों की कठपुतली बने रहे, जबकि वास्तविक सत्ता महमूदशाह के हाथ में थी। कासिम-उल-मुमालिक की मृत्यु के पश्चात् सत्ता उसके पुत्र अमीर-उल-बरीद के हाथों में चली गयी। अमीर-उल-बरीद को दक्कन की लोमड़ी कहा जाता था।

कल्लीमुल्ला शाह

यह अंतिम बहमनी शासक था, जिसने अपने राज्य को बचाने हेतु बाबर से सहायता मांगी थी। 1527 ई. में अमीर-उल-बरीद ने कल्लीमुल्ला शाह की हत्या कर बीदर के बरीदशाही वंश की स्थापना की।  1618-19 ई. में औरंगजेब ने बीदर पर अधिकार कर लिया।

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MCQs Questions On Bahmani kingdom

महमूद गयाँ

वह जन्म से ईरानी था और आरम्भ में वाणिज्य व्यापार में लगा हुआ था। सुल्तान ने उसे मलिक-उन-तुज्जार (व्यापारियों का प्रधान) का खिताब प्रदान किया था। इसके कुछ समय पश्चात् वह सुल्तान का पेशवा या प्रधानमंत्री बन गया। महमूद गवाँ का प्रमुख सैनिक योगदान पश्चिमी तट के प्रदेशों दाभोल और गोवा पर विजय प्राप्त करना था। महमूद गवाँ ने राज्य की उत्तरी सीमाओं को स्थायित्व प्रदान करने की कोशिश की थी।

महमूद गवाँ ने कई आंतरिक सुधार किए। उसने राज्य को आठ प्रांतों या तराफों में विभाजित किया था। महमूद गवाँ कला का बहुत बड़ा संरक्षक था। उसने राजधानो बीदर में एक भव्य मदरसा या विद्यालय बनवाया और भूमि की नियमित नाप के आदेश दिए। बहमनी सल्तनत की एक बड़ी समस्या अमीरों के मध्य होने वाले झगड़े थे। अमीर लोग पूर्वागंतुको दक्कनियों और अफ्रीकियों या नवागंतुकों (जो गरीब भी कहलाते थे) में बँटे हुए थे। महमूद गवाँ नवागंतुक था। उसके विरोधियों ने युवा सुल्तान को भड़का दिया तथा 1482 ई. में उसने महमूद गवाँ को मृत्युदंड दे दिया। शीघ्र ही बहमनी सल्तनत पाँच छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया गोलकुडा, बीजापुर, अहमदनगर, बरार और बीदर

बहमनी साम्राज्य का विभाजन

अहमदनगर के निजामशाह (1490-1633 ई.)

1490 ई. में मलिक अहमद ने स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर निजामशाही वंश की स्थापना की। 1633 ई. में शाहजहाँ ने इस वंश को इसे मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

बीजापुर के आदिल शाही (1490-1686 ई.) 

1490 ई. में युसुफ आदिल शाह ने बीजापुर को स्वतंत्र कर वहां आदिल शाही वंश की स्थापना की। इब्राहिम आदिलशाह ने फारसी के स्थान पर हिन्दी को राजभाषा बनाया था। इब्राहिम आदिलशाह द्वितीय को जगद्गुरू अबला यावा तथा निर्धनों का मित्र कहा जाता था। इसने किताब-ए-नौरस की रचना की। इस वंश का अंतिम शासक मुहम्मद आदिलशाह था। इसका मकबरा गोलगुंबद के नाम से प्रसिद्ध है।

गोलकुंडा के कुतुबशाही (1518-1687 ई.)

1518 ई. में कुली कुतुबशाह द्वारा गोलकुंडा की स्थापना तथा कुतुबशाही वंश की नींव डाली एवं गोलकुंडा को अपनी राजधानी बनाया। एक अन्य कुतुबशाही शासक मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने हैदराबाद नगर की स्थापना की एवं वहाँ पर प्रसिद्ध चार मीनार का निर्माण करवाया। औरंगजेब ने 1687 ई. में गोलकुंडा को मुगल साम्राज्य के अधीन कर लिया।

बरार के इमाद शाही (1490-1574 ई.)

1490 ई. में फुतुल्लाह खाँ इमाद-उल-मुल्क ने बरार में स्वतंत्रता की घोषणा की तथा इमादशाही वंश की स्थापना की। 1574 ई. में अहमद नगर ने बरार को अपने राज्य में मिला लिया।

बीदर के बरीदशाही (1527-1619 ई.)

1527 ई. में अमीर-उल-बरीद द्वारा बीदर बरीद शाही वंश की स्थापना की गयी। 1619 ई. में बीजापुर के आदिल शाही शासकों ने इसे अपने राज्य में मिला लिया।

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Vishal Singh

Vishal Singh

Teacher
“Hi, I am Vishal Singh. I completed my Graduations in Physics in 2020 at VKSU, Arrah. Now I'm Preparing For Civil Service Exams. I'm Interested Physics as well as History, Polity, Geography, Technology & Science.

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