सीरिया की सहायता के लिये, यूएन एजेंसियों की साझा अपील

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हिंसक टकराव, भ्रष्टाचार, कुप्रबन्धन, कोविड-19, पाबन्दियों और अब यूक्रेन युद्ध के प्रभावों की पृष्ठभूमि में, गेयर पैडरसन ने उन सीरियाई नागरिकों की मुश्किलों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनके लिये गुज़र बसर करना बेहद कठिन है.  

सीरिया की 90 फ़ीसदी से अधिक आबादी निर्धनता में रहने के लिये मजबूर है, देश में खाद्य असुरक्षा चरम पर है और क़रीब एक करोड़ 20 लाख सीरियाई नागरिकों को हर दिन भूख की मार झेलनी पड़ रही है

हर दो में से एक बच्चा स्कूल जाने से वंचित है, जिससे उनके लिये बाल मज़दूरी, जबरन विवाह, तस्करी और सशस्त्र गुटों में भर्ती किये जाने का जोखिम है.

सीरिया के लिये यूएन के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने मंगलवार को, Brussels VI Conference: “Supporting the future of Syria and the region, सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए क्षोभ व्यक्त किया कि पिछले 11 वर्षों में विशाल स्तर पर पीड़ा नज़र आई है.

भयावह हिंसक संघर्ष और एक मानवीय आदा ने देश की आधे से अधिक आबादी के जीवन को तबाह कर दिया है.  

यूएन दूत ने ध्यान दिलाया कि सीरिया में संकट का अब भी एक अन्तरराष्ट्रीय रूप है, जिसे सृजनात्मक कूटनीति के ज़रिये सुलझाये जाने की आवश्यकता है.

“यह कोई रहस्य नहीं है…कि हाल के अन्तरराष्ट्रीय घटनाक्रम, यूक्रेन में युद्ध, ने इसे पहले की तुलना में और भी अधिक कठिन बना दिया है.”

राजनैतिक समाधान, पहुँच से दूर

विशेष दूत के अनुसार, राष्ट्रव्यापी युद्धविराम और व्यापक स्तर पर सीरियाई नेतृत्व व स्वामित्व में सीरिया की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करने वाले राजनैतिक समाधान के लिये आग्रह जारी हैं. 

मगर, उन्होंने कहा कि देश की जनता की जायज़ आकाँक्षाओं को पूरा करने वाला राजनैतिक समाधान फ़िलहाल दूर है.

गेयर पैडरसन ने स्पष्ट किया कि ज़मीनी स्तर पर रणनैतिक अवरोध के बावजूद, सीरिया पर निरन्तर ध्यान दिये जाने की ज़रूरत है.

संसाधन उपलब्ध कराये जाने होंगे और राजनैतिक समाधान के प्रयास जारी रखने होंगे.  

आवश्यकताओं का अभूतपूर्व स्तर

मानव कल्याण मामलों में संयोजन के लिये यूएन प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने बताया कि एक दशक से जारी हिंसक संघर्ष के कारण, लम्बे समय से चले आ रहे संकट, बदहाल आर्थिक हालात, जलवायु व्यवधान और लिंग आधारित हिंसा के कारण, मानवीय आवश्यकताएँ, चरम स्तर पर हैं.

बताया गया है कि, इस वर्ष एक करोड़ 46 लाख सीरियाई नागरिकों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, जबकि अन्य देशों में रहे एक करोड़ 20 लाख सीरियाई शरणार्थियों और उनके मेज़बान समुदायों के लिये भी समर्थन चाहिये.



© UNICEF/Amer Almohibany

सीरिया के पूर्वी ग़ूता इलाक़े में एक ध्वस्त इमारत. (फ़ाइल)

उन्होंने कहा कि इसलिये यह हैरानी की बात नहीं है कि साढ़े 10 अरब डॉलर की सहायता धनराशि की ज़रूरत है, जिसमें से चार अरब 40 करोड़ सीरिया के भीतर और छह अरब 10 करोड़ डॉलर अन्य देशों में सीरियाई शरणार्थियों व उनके मेज़बानों के लिये ज़रूरी हैं. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के मुताबिक़, सीरिया के लिये जारी की गई यह अब तक सबसे बड़ी अपील है और उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस स्तर पर यह अन्तिम अपील होगी.

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना होगा कि सीरियाई महिलाएँ, पुरुष और बच्चे, हमारी नज़रों से दूर ना हों, और उन्हें भविष्य प्रदान किया जाए, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हो. 

बच्चों के लिये जानलेवा हालात

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख कैथरीन रसैल ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि एक पूरी पीढ़ी गुज़र बसर के लिये संघर्ष कर रही है.

उन्होंने कहा कि देश में युवजन की क़रीब एक-तिहाई आबादी लम्बे समय से कुपोषण का शिकार है, और यह सीरिया में एक बच्चे के लिये बेहद ख़तरनाक, जानलेवा समय है.

“युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक, हम क़रीब 13 हज़ार बच्चों के हताहत होने की पुष्टि कर सकते हैं, मगर हम जानते हैं कि यह संख्या इससे कहीं अधिक है.” 

सीरिया में युद्ध का बच्चों पर ना सिर्फ़ शारीरिक, बल्कि मानसिक असर भी हुआ है, और इन ‘अदृश्य घावों’ को भरने में एक लम्बा समय लग सकता है. 

यूनीसेफ़ प्रमुख ने बताया कि 28 लाख सीरियाई युवजन, जॉर्डन, लेबनान, इराक़, मिस्र और तुर्की में, एक अनिश्चित भविष्य के साथ जीवन गुज़ार रहे हैं.



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